The Dying Sensitivity of Humanity
February 19, 2025
मानवता तब मरी नहीं जब किसी गिरे हुए व्यक्ति को उठाया, अस्पताल पहुँचाया और उसकी सहायता की गई, बल्कि तब मरी जब लोग उसे उठाने ...
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Elevating Society Through Righteous Actions
February 18, 2025
सत्वगुणी कर्म की सत्वगुणी कर्म से कड़ी जोड़ते जाओ, तो सत्वगुणी लोगों का एक सशक्त और सदाचारी समाज बन जाएगा। जब आत्मबल, आत्मचिंतन, आत्मविचार से ...
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The Irony of Time and the Imbalance of Society
February 17, 2025
वक्त कभी फूलों की सेज है, तो कभी काँटों की बिछावन।हे प्रभु! तेरी रचित इस दुनिया में देखी उलटी रीत।अनपढ़, अपराधी, पाखंडी और ढोंगी राज ...
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Be Self-Reliant and Humble: Serve Society with Compassion
February 15, 2025
जीवन में इतना स्वावलंबी और निरभिमानी बनो कि तुम किसी जरूरतमंद की सहायता करने के लिए अपनी आमदनी का एक हिस्सा दान में दे सको।स्वावलंबी ...
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Self-Power and Sattvic Actions: The Distance Between Possible and Impossible
February 14, 2025
व्यक्ति का आत्मबल, आत्मचिंतन, आत्मविचार, आत्मजागरण, आत्मउत्साह और आत्मसाहस ही उसे संभव और असंभव के बीच की उस अज्ञात दूरी को पार करने की शक्ति ...
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Hard Work, Karmayoga, and Self-Balance: The Divine Path to Success
February 13, 2025
यदि हम यह मान भी लें कि प्रारब्ध और भाग्य में लिखे कर्म के सिद्धांत को बदला नहीं जा सकता, तो भी पुरुषार्थ, कर्मयोग और ...
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