सामाजिक

The Dying Sensitivity of Humanity

मानवता तब मरी नहीं जब किसी गिरे हुए व्यक्ति को उठाया, अस्पताल पहुँचाया और उसकी सहायता की गई, बल्कि तब मरी जब लोग उसे उठाने ...
Read More →
सामाजिक

Elevating Society Through Righteous Actions

सत्वगुणी कर्म की सत्वगुणी कर्म से कड़ी जोड़ते जाओ, तो सत्वगुणी लोगों का एक सशक्त और सदाचारी समाज बन जाएगा। जब आत्मबल, आत्मचिंतन, आत्मविचार से ...
Read More →
सामाजिक

The Irony of Time and the Imbalance of Society

वक्त कभी फूलों की सेज है, तो कभी काँटों की बिछावन।हे प्रभु! तेरी रचित इस दुनिया में देखी उलटी रीत।अनपढ़, अपराधी, पाखंडी और ढोंगी राज ...
Read More →
सामाजिक

Be Self-Reliant and Humble: Serve Society with Compassion

जीवन में इतना स्वावलंबी और निरभिमानी बनो कि तुम किसी जरूरतमंद की सहायता करने के लिए अपनी आमदनी का एक हिस्सा दान में दे सको।स्वावलंबी ...
Read More →
आध्यात्मिक

Self-Power and Sattvic Actions: The Distance Between Possible and Impossible

व्यक्ति का आत्मबल, आत्मचिंतन, आत्मविचार, आत्मजागरण, आत्मउत्साह और आत्मसाहस ही उसे संभव और असंभव के बीच की उस अज्ञात दूरी को पार करने की शक्ति ...
Read More →
आध्यात्मिक

Hard Work, Karmayoga, and Self-Balance: The Divine Path to Success

यदि हम यह मान भी लें कि प्रारब्ध और भाग्य में लिखे कर्म के सिद्धांत को बदला नहीं जा सकता, तो भी पुरुषार्थ, कर्मयोग और ...
Read More →
Shopping Cart
Scroll to Top
Enable Notifications OK No thanks