सामाजिक

Why Is Criticism More Pleasing Than Praise?

प्रशंसा से अधिक प्रिय निंदा क्यों? दुनिया के अधिकांश लोगों को अपनी प्रशंसा सुनकर सुखद अनुभूति होती है, लेकिन एक रोचक सत्य यह है कि किसी परिचित व्यक्ति की निंदा सुनकर उन्हें कहीं अधिक संतोष मिलता है। यह एक मनोवैज्ञानिक विरोधाभास है—हम न केवल दूसरों की आलोचना सुनना पसंद करते हैं, बल्कि यदि वह आलोचना […]

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The True Essence of Selfless Service

निःस्वार्थ सेवा का स्वरूप अपेक्षारहित अथवा निःस्वार्थ सेवा मानव जीवन में परमार्थ, परोपकार और कल्याण का मार्ग ही नहीं, बल्कि ईश्वर की आराधना और समर्पण का एक रूप भी है। यदि जीवन में सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हो, तो सभी की सेवा कीजिए, परंतु किसी से भी कोई अपेक्षा मत रखिए। क्योंकि सेवा का

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The Divine Path of Human Life: Ethics, Virtue, and Self-Elevation

मानव जीवन का दिव्य मार्ग: नैतिकता, सदाचार और आत्मउन्नति प्रत्येक इंसान में आंतरिक एवं बाहरी विशेषताओं के साथ कमियों की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता। यह सब उसके जीवन में प्रारब्धानुसार ही निर्भर करता है। बावजूद इसके, हर इंसान के मन और चित्त में यह तथ्यात्मक बात स्थापित होनी चाहिए कि जीवन में

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Priority And Time Management The Key To A Successful Life

प्राथमिकता और समय प्रबंधन: सफल जीवन की कुंजी यदि मनुष्य अपने जीवन की प्राथमिकता तय कर ले और समय प्रबंधन का समन्वय कर ले, तो कितना भी बड़ा लक्ष्य क्यों न हो, वह आसान हो जाता है। कोई भी बुद्धिमान, विवेकशील एवं प्रतिभाशाली व्यक्ति सभी कार्यों को करने की पूर्ण क्षमता रखता है, लेकिन वह

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The Search for Happiness: Reality or Illusion?

सुख इंसान को कैसे मिल सकता है? किसी को धन के अभाव का दुःख है तो कोई धन की सुरक्षा को लेकर भयभीत है। चारों ओर संकट, कठिनाइयों और समस्याओं से भरी हुई गठरी है। आजकल ज्यादातर लोगों को धन-संपत्ति की बहुलता के कारण परिवारजनों में आए विवाद तथा उनके परस्पर झगड़े-बखेड़े परेशान किए हुए

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The Value of Time: The Key to Success and Spiritual Practice

भारतवासियों में समय की पाबंदी का यही हाल है कि समय की कोई कीमत उनके लिए नहीं होती। यदि उन्हें वायुयान भी पकड़ना हो तो वे अंतिम समय पर ही पहुँचते हैं। यही स्थिति जीवन में भी होती है। युवावस्था में, जब जप-तप, उपासना और साधना का उचित समय होता है, तब कोई इन कार्यों

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Sakam Karma: The Root of Greed and Discontent

सकाम या सकामी करने का उद्देश्य व्यक्ति के सकारात्मक जीवन से नहीं जुड़ा होता, बल्कि तृष्णा से जुड़ा होता है।एक सकामी व्यक्ति अपने मन और चित्त को खाने-पीने, देखने-सुनने आदि की इच्छाओं में उलझाए रखता है। वह चोरी, छल-कपट और अन्य कुकर्मों के माध्यम से धन जुटाने का प्रयास करता है और उसे संचित करता

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The Declining Moral Standards in Education: Causes and Reflections

आजकल विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अधिकतर शिक्षकों एवं प्रोफेसरों का नैतिक स्तर अत्यंत शोचनीय एवं विचारणीय हो गया है।पहले के शिक्षकों का वेतन आज की अपेक्षा बहुत कम था, फिर भी वे कर्तव्यनिष्ठ होकर निःस्वार्थ भाव से विद्यार्थियों को विद्या प्रदान करते थे। उस समय भी जीवन यापन सुचारू रूप से चलता था, आवश्यकताएँ पूरी

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Selfish Happiness: Temporary Joy at the Cost of Other’s Suffering

ज्यादातर व्यक्ति परिवार और समाज में ऐसे होते हैं, जो स्वयं केवल अपना ही सुख चाहते हैं, लेकिन दूसरों के सुख का ख्याल बिल्कुल नहीं रखते। इन लोगों को केवल अपने और अधिक से अधिक अपने परिवार, जैसे सगे भाई-बहनों के स्वार्थ का ही ध्यान रहता है। इस सुख को प्राप्त करने के लिए ये

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Human Brain and Computer: The Difference Between Matter and Conscious Energy

वैज्ञानिकों ने एक जड़ यंत्र कंप्यूटर का आविष्कार कर मानव मस्तिष्क के कार्यों को काफी हद तक अपने हक में कर लिया है, लेकिन फिर भी मस्तिष्क की जो चैतन्य एवं प्राकृतिक सूक्ष्म दिव्य क्षमता है, वह न केवल आज बल्कि किसी भी युग में कंप्यूटर में नहीं आ सकती। जैसे आज के वैज्ञानिक रक्त

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