सामाजिक

कर भला तो हो भला , सबके भले में अपना भला , मिल बाँटकर खाओं और सभी वैकुण्ठ (Abode Of God) में जाओं

आज परिवार , अड़ोस-पड़ोस , समाज , मोहल्ले में आपस में स्वार्थ की ऋणात्मक ऊर्जा यानि कि छल कपट , ईर्ष्या-द्वेष , लोभ , लालच ...
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सामाजिक

अपने कर्म एवं कर्तव्य का पालन करते जाएँ , जीवन में सुख- शांति स्वत: मिलती जाएगी

छोटे- परिवारों में इसी कारण से जीवन की दौड़ में पीछे रह जाते है , यह विचार करे कि घर में बड़े हैं न , ...
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