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महापुरुष से अध्यात्म जुड़ा हैं
जहाँ किसी आश्रम , मंदिर में कोई दिव्य सद् गुरु, महापुरुष निवास करते हैं या उसके जीवन की कोई अध्यत्मिक-विशेष घटना घटित होती हैं , तो उस सद्गुरु , महापुरुष के दिव्य-शरीर से निकलने वाली सूक्ष्म-आध्यात्मिक चेतन तरंगे , वहाँ के वातावरण में फैल जाती हैं , जिसका प्रभाव लम्बे समय तक वातावरण में बना रहता हैं। सद्गुरु की जितनी सामर्थ्य जितना अधिक होता हैं ,उतनी ही तरंगे अधिक वेगमान तथा अधिक समय के लिए प्रभावी रहती हैं। उन सूक्ष्म तरंगो के संपर्क में आने के लिए मन , चित्त में सूक्ष्म तरंगो की क्षमता का होना मनुष्य में अति आवश्यक हैं। सूक्ष्मता ही सूक्ष्मता के प्रति आकर्षित होती हैं, जड़ चित्त में ही उलझा रहता हैं। इसलिए सामान्य मनुष्यों का चित्त स्थूल संसार तक ही पहुँच पाता हैं, किन्तु आध्यात्मिक दृष्टी से उन्नत भक्त , उपासक, साधक , सूक्ष्म तरंगों को पकड़ पाने में समर्थ होता हैं। यह सब मन चित्त की स्थिति की बात हैं। यदि हम चाहे तो इसे एक सिद्धि भी कह सकते हैं , किन्तु यह तथ्यात्मक बात केवल मन और चित्त की पवित्रता की हैं| यही कारण हैं कि हम माँ बगला मुखी , माँ तारा, पाप हरेश्वर महादेव पीठ , बिजना की कुमारिका वन “ॐ” आकार की पहाड़ी पर कई दिव्य गुरुओं , दिव्य संतो के शरीर से उद्भूत सूक्ष्म-तरंगो को अनुभव कर पाए , अन्य लोग चित्त की स्थूलता के कारन , स्थूलता तक ही रह गए तथा तरंगों का अनुभव नहीं कर पाते हैं|
कुछ मुख्य बिंदु
यहाँ कुछ प्रमुख बिंदु हैं, जो इस अध्यात्मिक लेख का सार प्रस्तुत करते हैं:
- महापुरुष और अध्यात्मिक तरंगे
- महापुरुषों या सद्गुरुओं के दिव्य शरीर से उत्पन्न सूक्ष्म अध्यात्मिक तरंगें वातावरण में फैल जाती हैं, जो उस स्थान को लंबे समय तक प्रभावित करती हैं।
- सामर्थ्य और तरंगों की तीव्रता
- सद्गुरु की अध्यात्मिक सामर्थ्य जितनी अधिक होती है, उतनी ही उनकी तरंगें भी तीव्र और अधिक समय तक प्रभावी रहती हैं।
- मन की सूक्ष्मता का महत्व
- सूक्ष्म तरंगों के अनुभव के लिए व्यक्ति के मन और चित्त में सूक्ष्मता की क्षमता आवश्यक होती है। स्थूल चित्त के लोग इन तरंगों को अनुभव नहीं कर पाते।
- सूक्ष्मता के प्रति आकर्षण
- केवल सूक्ष्मता ही सूक्ष्मता की ओर आकर्षित होती है। सामान्य व्यक्ति का चित्त स्थूल जगत तक ही सीमित रहता है, जबकि उन्नत साधक सूक्ष्म तरंगों को अनुभव कर सकता है।
- सिद्धि और चित्त की पवित्रता
- यह विशेष क्षमता मन और चित्त की पवित्रता से जुड़ी होती है, जिसे एक प्रकार की सिद्धि भी माना जा सकता है।
- दिव्य स्थलों का प्रभाव
- कुछ विशेष आध्यात्मिक स्थानों जैसे कि माँ बगला मुखी, पाप हरीश्वर महादेव पीठ, और बिजना की कुमारिका वन में इन सूक्ष्म तरंगों को अनुभूत किया जा सकता है।
- साधारण और उन्नत चित्त का अंतर
- जिनका चित्त स्थूलता में फंसा होता है, वे इन दिव्य तरंगों का अनुभव नहीं कर पाते, जबकि उन्नत भक्त और साधक इन तरंगों के संपर्क में आते हैं।
ये बिंदु दर्शाते हैं कि कैसे महापुरुषों के सानिध्य से उत्पन्न सूक्ष्म तरंगें केवल उनके दिव्य अनुभव की गहराई में रमण करने वाले लोगों को ही महसूस हो पाती हैं।
