Post Views: 729
श्रीमद्भगवद्गीता पर चिंतन: गणराज्य और एकतंत्र विचारधाराओं का संग्राम
श्रीमद् भगवत गीता पर चिंतन , विचार करने के लिए इन दिव्य तथ्यों को भी जानें – महाभारत युद्ध गणराज्य समर्थकों और एकतंत्र समर्थकों के मध्य हुआ था। गीता जी के प्रथम श्लोक – “धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे “ धर्म क्षेत्र अर्थात गण राज्यों में और कुरुक्षेत्र अर्थात एक तंत्रों में रहने वाले विशिष्ठ लोग। गणराज्यों को धर्मक्षेत्र इसलिए कहा कि वे धर्म , दानी , यम -नियम से परमार्थ परोपकार एवं कल्याणार्थ से चलते हैं और एक तंत्रों को कुरुक्षेत्र इसलिए कहा कि वे व्यक्तिमत बाहुबल अर्थात “हिटलर – शाही “ से चलते हैं, इसलिए गणराजवादी नायक युधिष्ठिर को धर्मराज तथा एकतंत्रवादी राजा को धृतराष्ट्र , दुर्योधन कहा। पांडव , भगवान कृष्ण और उनके साथी गणराज्य समर्थक थे और कौरव और उनके साथी एकतंत्र समर्थक थे। भारतीय लोकमानस पुरातन काल से गणराज्य का समर्थक रहा हैं , इसलिए उसने पांडवों और उनके साथी कृष्ण द्वारा किए गए कार्यों का समर्थन किया तथा कौरवों द्वारा गलत कार्यों को करने पर दुष्ट एवं अन्यायी कारक माना। “प्रबल गणराज्य “ समर्थक होने तथा गणराज्य की अवधारणा में नया आयाम जोड़ने के कारण कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार मान कर दोनों पूजनीय हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु
1. महाभारत युद्ध का संदर्भ
- महाभारत युद्ध गणराज्य समर्थकों और एकतंत्र समर्थकों के बीच हुआ।
- युद्ध के मुख्य पक्ष: पांडव (गणराज्य समर्थक) और कौरव (एकतंत्र समर्थक)।
2. धर्मक्षेत्र और कुरुक्षेत्र का अर्थ
- “धर्मक्षेत्र” गणराज्य क्षेत्रों का प्रतीक है, जो धर्म, दान, और परोपकार पर आधारित हैं।
- “कुरुक्षेत्र” एकतंत्र समर्थित क्षेत्रों का प्रतीक है, जो बाहुबल और अधिनायकवाद पर आधारित हैं।
3. नायकों की भूमिकाएं
- युधिष्ठिर को “धर्मराज” कहा गया क्योंकि वे गणराज्य के आदर्शों का समर्थन करते थे।
- धृतराष्ट्र और दुर्योधन एकतंत्र के प्रतीक के रूप में चित्रित हैं।
4. गणराज्य और भारतीय लोकमानस
- भारतीय लोकमानस प्राचीन काल से गणराज्य का समर्थक रहा है।
- पांडवों और भगवान कृष्ण के कार्यों को सही और धर्मपूर्ण माना गया।
5. भगवान कृष्ण की भूमिका
- भगवान कृष्ण को गणराज्य समर्थक और “प्रबल गणराज्यवादी” के रूप में देखा गया।
- गणराज्य की अवधारणा में योगदान के कारण उन्हें विष्णु का अवतार माना गया।
6. धर्म बनाम अधर्म की लड़ाई
- यह युद्ध सिर्फ भौतिक नहीं था, बल्कि आदर्शों और मूल्यों की लड़ाई थी।
- गणराज्य का समर्थन करने वाले लोग परोपकार और धर्म की ओर झुके हुए थे।
7. गीता का आध्यात्मिक संदेश
- गीता का प्रथम श्लोक “धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे” इस संघर्ष का प्रतीक है।
- यह संघर्ष धर्म और अधर्म के बीच संतुलन स्थापित करने का संदेश देता है।
