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आहार का मानसिक और शारीरिक प्रभाव
कुछ विशेष प्रकार के आहार या भोजन हमारे मन , चित्त में ऋणात्मक विशेष प्रकार के विकार पैदा करते हैं। यह हम प्रतिदिन स्पष्ट रूप से अनुभव करते हैं। कुछ दूसरे प्रकार के आहारों का शरीर पर अन्य प्रकार का परिणाम होता हैं और अंत में वह मन , चित्त , इन्द्रियों पर भी बहुत असर पहुँचाता हैं। इसे हमे बहुत बड़ी सीख मिलती हैं कि हम जिन दुखों को वर्तमान में भोग रहे हैं उनका अंश हमें अपने खाए हुए भोजन द्वारा ही प्राप्त होता हैं। ऐसे खाद्य पदार्थ है जो उत्तेजक होते हैं या अन्य किसी नशीले पेय का व्यव्हार करने से मनुष्य अपने मन को नियंत्रित करने में असमर्थ हो जाता है , ऐसी अवस्था में मन , चित्त बेकाबू होकर इधर उधर भागने लगता हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु
- आहार और मानसिक विकार – कुछ खाद्य पदार्थ मानसिक विकार उत्पन्न कर सकते हैं, जो चित्त और मन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
- शारीरिक असर – भोजन का शरीर पर भी प्रभाव पड़ता है, जो अंततः मन, चित्त और इंद्रियों को प्रभावित करता है।
- वर्तमान दुखों का कारण – हम जिन दुखों का सामना कर रहे हैं, उनका कुछ हिस्सा हमारे द्वारा खाए गए भोजन से संबंधित हो सकता है।
- उत्तेजक आहार – उत्तेजक खाद्य पदार्थ और नशीले पेय मन को नियंत्रित करने में असमर्थ बना सकते हैं।
- मन की स्थिति – नशीले पदार्थों और उत्तेजक आहारों के कारण मन बेकाबू हो सकता है और दिशा से भटक सकता है।
