आध्यात्मिक

Self-Power and Sattvic Actions: The Distance Between Possible and Impossible

व्यक्ति का आत्मबल, आत्मचिंतन, आत्मविचार, आत्मजागरण, आत्मउत्साह और आत्मसाहस ही उसे संभव और असंभव के बीच की उस अज्ञात दूरी को पार करने की शक्ति प्रदान करते हैं। जब हम अपने भीतर के सत्वगुणी कर्मों का पालन करते हैं और अपने आत्मबल को जागृत करते हैं, तब हम किसी भी कठिनाई या चुनौती का सामना […]

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Hard Work, Karmayoga, and Self-Balance: The Divine Path to Success

यदि हम यह मान भी लें कि प्रारब्ध और भाग्य में लिखे कर्म के सिद्धांत को बदला नहीं जा सकता, तो भी पुरुषार्थ, कर्मयोग और समय प्रबंधन में समन्वय स्थापित कर सत्वगुणी कर्म करते रहना ही सच्ची उन्नति का मार्ग है। जब हम बिना फल की चिंता किए सतत कर्म करते हैं, तो आत्मबल, आत्म-संतुलन,

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The Path of Self-Balance, Self-Awakening, and Karmayoga

“बैचैनी और उदासी का अर्थ है कि मन और चित्त अतीत में डूबा हुआ है। अशांत और तनावग्रस्त होने का अर्थ है कि मन भविष्य की चिंता में विचलित है। लेकिन शांति, आत्मबल और स्थिरता तभी संभव है जब मन पूर्ण रूप से वर्तमान में स्थित हो।” अतः आत्मबल, आत्म-संतुलन, आत्म-विश्वास, आत्म-खोज, और आत्म-जागरण को

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Virtue and Inner Strength: The Path to True Success

“आज यदि सत्वगुण और आत्मबल को धारण कर जीवन जीने के मार्ग का निर्माण कर लिया है, तो यह साहस से भरी कोशिश धीरे-धीरे आगे बढ़ेगी और एक दिन उन्नति के शिखर पर पहुँचकर ही दम लेगी। यह अनुभूत सत्य है।” जब व्यक्ति सत्वगुण और आत्मबल के साथ अपने जीवन का मार्ग तय करता है,

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Control of Mind, Intellect, Brain, and Heart: Victory Over Life’s Challenges

“मन, चित्त, मस्तिष्क और हृदय को नियंत्रित करना सबसे कठिन कार्य है, लेकिन जिस सत्वगुणी इंसान ने इन्हें साद लिया, वह जीवन की प्रत्येक प्रकार की कठिनाइयों, मुसीबतों आदि पर आसानी से विजय प्राप्त कर पाया है।” मन और मस्तिष्क के बीच लगातार संघर्ष होता है, और जब तक इनका सही नियंत्रण नहीं किया जाता,

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Destiny Is Shaped By One’s Own Actions.

अपने कठिनाइयों, परेशानियों, दुख और पीड़ा के लिए संसार को कभी दोष न दें, क्योंकि ये आपके ही पूर्व कर्मों का परिणाम हैं, जो मन और चित्त में संचित संस्कारों के रूप में मौजूद होते हैं। इसलिए, इन संचित वासनाओं और विकारों को क्षीण करें और अपने भाग्य को स्वयं उज्जवल बनाएं। नियति और प्रारब्ध

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The Limits of Human Effort and the Infinite Grace of God

यदि सृष्टि में प्रत्येक सूक्ष्म और स्थूल कार्य केवल मानव प्रयासों से ही संभव होता, तो प्रभु के अस्तित्व का कोई अर्थ नहीं होता। जहाँ मानव प्रयासों की सीमा समाप्त होती है, वहीं से ईश्वर का दिव्य कार्य आरंभ होता है। इसलिए, जीवन का सार भक्ति, प्रार्थना, ध्यान और आध्यात्मिक साधना में निहित है। जब

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Divine Energy: The Foundation of Creation and the Divine Vision of Unity in Diversity

ब्रह्मांड में ईश्वरीय शक्ति: एकता में अनेकता का दर्शन ब्रह्मांड में ईश्वरीय शक्ति केवल एक ही है, किंतु उसके विभिन्न कार्यों के अनुसार उसे अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। ये नाम शक्ति के नहीं, बल्कि उसकी विभिन्न क्रियाओं के हैं। शक्ति में भिन्नता नहीं है, भिन्नता केवल उसकी क्रियाओं में है। ये सभी क्रियाएं

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Shiva and Shakti: The Spiritual Mystery of Cosmic Balance

अध्यात्म पथ के सभी सम्प्रदायों में केवल शक्ति की ही नहीं, बल्कि शिव सहित शक्ति की उपासना की जाती है, अर्थात उनकी शक्ति, शिव की ही शक्ति है। शक्ति जो भी रूप धारण कर क्रिया करती है, शिव उसके आधार रूप में सदैव उसके साथ रहते हैं। शिव रूपी आधार में कोई भी आंदोलन नहीं

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Paaphareshwar Mahadev Peeth: Double Merit and Happiness with the Blessings of Shiva and Parvati

पापेश्वर महादेव पीठ: शिव-पार्वती की कृपा से दोगुना पुण्य और सुख सर्व सिद्ध माँ बगलामुखी तारा, लक्ष्मी एवं पापहरेश्वर महादेव महाकाल पीठ में पूजा-हवन का दोगुना फल क्यों मिलता है? चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व है क्योंकि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। विवाह के उपरांत, दोनों ॐ

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