The Dying Sensitivity of Humanity
मानवता तब मरी नहीं जब किसी गिरे हुए व्यक्ति को उठाया, अस्पताल पहुँचाया और उसकी सहायता की गई, बल्कि तब मरी जब लोग उसे उठाने के बजाय तमाशबीन बनकर खड़े रहे, वीडियो और रील बनाने में व्यस्त हो गए। आज का समाज संवेदनहीनता की ओर बढ़ता जा रहा है। करुणा और सहानुभूति जैसी भावनाएँ धीरे-धीरे […]
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