The Limits of Human Effort and the Infinite Grace of God
यदि सृष्टि में प्रत्येक सूक्ष्म और स्थूल कार्य केवल मानव प्रयासों से ही संभव होता, तो प्रभु के अस्तित्व का कोई अर्थ नहीं होता। जहाँ मानव प्रयासों की सीमा समाप्त होती है, वहीं से ईश्वर का दिव्य कार्य आरंभ होता है। इसलिए, जीवन का सार भक्ति, प्रार्थना, ध्यान और आध्यात्मिक साधना में निहित है। जब […]
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