Author name: कौशल बंसल जी "शिवोम्" बगला मुखी साधक

 Letting Go Of Ego: The True Path To Attaining God

अहंकार का त्याग: ईश्वर प्राप्ति की सच्ची साधना अहंकार का त्याग ही ईश्वर की वास्तविक पूजा, पाठ, जप, तप, और भक्ति साधना है। तपस्या का मूल मंत्र है – आत्म-संयम और भगवान में पूर्ण विश्वास। यही न केवल आत्मा को शुद्ध करता है, बल्कि यह भविष्य में भाग्य उदय और ईश्वर प्राप्ति का आधार और […]

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Decay of Lust: Path to Self-Purification Through Devotion and Sadhana

वासना का क्षय: भक्ति और साधना से आत्मशुद्धि का मार्ग मनुष्य को इस तथ्यात्मक बात और शाश्वत सत्य को समझ लेना चाहिए कि जब तक मन और चित्त में विकार और वासना के संस्कार, जो प्रारब्ध निर्माण के कारक तत्व हैं, पूर्ण रूप से निर्मूल नहीं हो जाते, तब तक वासना भी बनी रहती है।

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Decay of Desire: The Path To Self Purification Through Devotion And Spiritual Practice

वासना का द्वंद्व: ईश्वर प्राप्ति और सांसारिक इच्छाओं का मार्ग मनुष्य के मन, चित्त और मस्तिष्क में दो प्रकार की वासनाएँ कार्य करती हैं—एक ईश्वर प्राप्ति की इच्छा रूप एवं कामना रूपी वासना, जो शुभ या धनात्मक वासना है। ईश्वर प्राप्ति के पश्चात् शुभ वासना भी विलीन हो जाती है। किन्तु कितना ही सुख-संपत्ति प्राप्त

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Commitment And Its Importance

वचनबद्धता और उसका महत्व सामान्य जन , सामान्यतः इस ओर ध्यान नहीं देते एवं किसी से भी वचन बद्ध हो जाते हैं। सत्व गुणी मनुष्य को इस तथ्यात्मक बात की बहुत सावधानी रखनी पड़ती हैं कि उससे कोई असत्य भाषण न हो जाए। इसके लिए यह आवश्यक हैं कि वह भविष्य के लिए किसी से

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The Righteous Path To Earning Wealth

धनार्जन का धर्मसम्मत मार्ग  मनुष्य के लिए जीवन व्यापन के लिए धन आवश्यक हैं , किन्तु धनोपार्जन न्यायपूर्वक धर्माचरण करते हुए , उचित ढंग से करना ही चाहिए। यदि अन्याय करके अपराधिक प्रवृत्ति करके , धोका – चल – कपट देकर चोरी – डकैती करके , अधर्मपपूर्वक धन एकत्रित किया जाए तो उससे मन ,

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The Mantra of Success: Inspiration to Rise After Falling

सफलता का मंत्र: गिरकर उठने की प्रेरणा गिरना इतना बुरा नहीं हैं जितना कि गिरकर न उठना हैं , इस तरह चलते , फिरते , गिरते -उठते तथा फिर चलते , मनुष्य अंतिम लक्ष्य प्राप्त अवश्य ही कर लेता हैं।  महत्वपूर्ण बिंदु गिरना असफलता नहीं है – गिरना उतना बुरा नहीं है जितना गिरकर न

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Hang 9 Enchanted Bells and 9 Consecrated Coins at Your Door to Bring Prosperity and Good Fortune to Yourself and Your Family

द्वार पर ९ घंटियाँ और ९ सिक्के अभिमंत्रित कर लटकाएँ और अपना और अपने परिवार का भाग्योदय करें अपने द्वार पर ९ घंटियाँ और ९ सिक्के अभिमंत्रित कर लटकाएँ और अपना और अपने परिवार का भाग्योदय कीजिए।   परमेश्वर के आदेश की कोई व्याख्या या परिभाषा नहीं कर सकता।  उसके आदेश से ही विभिन्न शास्त्रों की

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Living And Following Virtues According To God’s Commandments

ईश्वर के आदेशानुसार जीवन और संस्कारों का पालन मनुष्य उसके प्रारब्धानुसार सुख अथवा दुःख जिस भी स्थिति में ईश्वर रखता हैं , उसमें चित्त में संचित संस्कार को संतुलित अवस्था में बनाए रखकर , परमात्मा के आदेशानुसार सत्व गुणों का पालन एवं उसके आधार पर जीवन व्यापन करने का प्रयत्न करना चाहिए।   महत्वपूर्ण बिंदु प्रारब्धानुसार

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Gods Creation And The Existence Of Humanity

ईश्वर की सृष्टि और मनुष्य का अस्तित्व ईश्वर ने जड़ निर्जीव एवं जीव दो प्रकार की सृष्टि का निर्माण किया हैं।  एक तो अचल (पंच तत्व – पृथ्वी , जल , वायु , अग्नि और आकाश ) तथा दूसरे चल जीव (८४ लाख योनियाँ) | जीवों का अस्तित्व भौतिक सृष्टि , संसार पर आधारित होता

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Divine Consciousness And Purification Of The Mind Through Karma

ईश्वरीय चेतना और कर्म से चित्त की शुद्धि जब मानव में ईश्वरीय चैतन्य सूक्ष्म शक्ति जप-तप , प्रार्थना आदि से अंतर में जाग्रत एवं कार्यशील हो उठती हैं तो भक्त , साधक के चित्त में संचित पाप राशि को जलाकर भस्म कर देती हैं।  इसलिए आतंरिक जाग्रत ईश्वरीय चेतन सूक्ष्म शक्ति को अग्नि की उपमा

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