Author name: कौशल बंसल जी "शिवोम्" बगला मुखी साधक

Human Being

मनुष्य जीव ईश्वर भी सोचता होगा कि यह मैने कैसा जीव (इंसान) बना दिया ? कल्पना के आधार पर एक दूसरे का गला काटने में लगे हैं। ईश्वर के सम्बन्ध में विवाद निरर्थक हैं। आचार्यों ने कुंडली जाग्रत के उपरान्त जैसा अनुभव हुआ सिद्धांत स्थापित कर दिए। उस आधार पर मत- मतान्तर खड़े होते चले […]

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भगवा वस्त्र तथा तपस्वी

जो व्यक्ति भगवा वस्त्र पहन कर तपस्वी जीवन व्यतीत नहीं करता ,वह तपस्वी का वेश धारण कर लोगों को ठगता फिरता हैं।  भगवा रंग अग्नि का प्रतीक हैं , तथा अग्नि तप का पर्याय हैं।  जिस प्रकार अग्नि में कुछ डालों , भस्म हो जाता हैं , उसी प्रकार तप रुपी अग्नि में वासनाएँ ,

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महालक्ष्मी की दिव्य कृपा

ईश्वर और लक्ष्मी जी की कृपा में बड़ा अंतर हैं।  ईश्वर स्वतंत्र होकर जीव निर्जीव को उनके कर्म के अनुसार दण्ड देने वाले भी हैं।  इसलिए कृपा हमेशा उनके ईश्वर के बस में नहीं रह सकती।   किन्तु महालक्ष्मी केवल दयामूर्ति हैं।  दण्डनीय बुद्धि उनमे स्वप्न में भी नहीं आती माँ लक्ष्मी दया का महान अवतार

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अध्यात्म की राह, मन की बंदिश

अध्यात्म बड़ा आसान हैं किन्तु हृदय , मन चित्त तथा संसार ने मिलकर इसे जटिल बना दिया हैं केवल हृदय ,मन और चित्त को संसार से मोड़ना ही तो अध्यात्म हैं।   बुल्लेशाह ने यही बात अपने गुरूजी से पूछी तो उन्होंने कहा कि, “भगवान् को प्राप्त करने में क्या कठिनाई हैं ? हृदय , मन

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 धर्म संप्रदाय में राजनीती का प्रभाव

आजकल धर्म , सम्प्रदाय और पंथ में राजनीती का प्रभाव अत्यधिक बढ़ रहा हैं।  मनुष्य ने अपने पीछे अधिक से अधिक जन-समुदाय को आकर्षित करने की प्रवृत्ति एवं वृत्ति पनप रही हैं।   जिस प्रकार आज राजनीति में भी हर व्यक्ति अलग – अलग सत्ता स्वार्थवश कड़ी कर रहा हैं, उसी प्रकार धर्म के नाम पर

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ब्रह्मचर्य के प्रति भ्रांतियाँ

आजकल आध्यात्मिकता की प्राचीन मान्यताओं ब्रह्मचर्य के प्रति भ्रांतियाँ फैलाकर , अपने सम्प्रदाय की सर्वोच्चता का झंडा गड़ा जाता हैं।   सनातन धर्म के ऋषियों संतों तथा महापुरुषों ने आध्यात्मिकता पर बड़ी सूक्ष्मता से विचार करने के पश्चात ही निष्कर्ष (जो सत्य के नजदीक) निकाले हैं।   वे मानव के सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों पक्षों से पूर्णतः

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श्री राम द्वारा दिखाया गया मार्ग

आज प्रभु राम की वंदना करने के साथ साथ यह भी आवश्यक है कि हम उनके दिखाए “दिव्य एवं धनात्मक” मार्ग पर निरंतर चले।   प्रभु राम भारतीय संस्कृति में धर्म , सत्य , शौर्य , शील संयम , विनम्रता , मर्यादा आदि गुणों के दिव्य-प्रतीक हैं।  इन गुणों के कारन ही हम उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम

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मर्यादा पुरुषोत्तम राम

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम  जी का प्रत्येक आचरण हमे जीवन जीने की संजीवनी देता है।   प्रभु श्री राम हजारों- वर्षो बाद भी भारतीय संस्कृति का आधार बने हुए हैं तो इसलिए कि वे हमारी चेतना में समाए हैं।   राम के चरित्र को जानकर ही हम समझ सकते है कि क्या महत्त्व हैं।  राम ने धर्म

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श्रेष्ठ परिवार प्रमुख वही है जो विषैली बातों को भीतर दबाए रखे और भगवान शिव के सामान एकता कायम रखे

श्रेष्ठ परिवार प्रमुख वही है जो विषैली बातों को भीतर दबाए रखे और भगवान शिव के सामान एकता कायम रखे। परिवार-प्रमुख के कानों में कभी-कभी परिवार सम्बन्धी ऐसी विषैली तथ्यहीन बातें आती हैं , जिन्हें यदि वह उगल दे (प्रकट करे) तो गृह कलेश उत्पन्न होगा और यदि पचाने की चेष्टा करे तो अपना मानसिक

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शिव परिवार एकता और प्रेम के अटूट बंधन में बंधा हुआ है

हमारे परिवार में विभिन्न प्रकृति सूत्र के लोगों को एकता एवं प्रेम के सूत्र में जो बाँधकर रख सके , व्ही सर्वश्रेष्ठ परिवार प्रमुख है। शिव पर्यावर एक दिव्या एकता एवं दिव्य प्रेम के अटूट समन्वय में बंधा हुआ है जहाँ शिवजी का वाहन बैल , उमा (माँ पार्वती) का वाहन सिंह। कार्तिकेय का वहां

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