Author name: कौशल बंसल जी "शिवोम्" बगला मुखी साधक

मनुष्य जन्म: भाग्य का उपहार

अपने भाग्य , किस्मत , नसीब को कभी भी दोष मत दीजिये , प्रारब्ध के अनुसार मनुष्य-योनि के रूप में ८४ लाख योनियों के बाद जन्म मिला हैं | यह मनुष्य का भाग्य नहीं तो क्या हैं ? मनुष्य ठोकर खाकर गिर गया , यह बताना आवश्यक नहीं हैं , यह बताना अति आवश्यक एवं […]

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परिवार में संस्कार

यदि हमें परिवार , समाज में धनात्मक ऊर्जा पैदा करनी है तो सर्वप्रथम हमें अपने बेटों को एक अच्छा कर्तव्य निष्ठ , सत्य गुणी , ऊर्जावान नागरिक , अच्छा भाई , अच्छा पडोसी , अच्छा पति , अच्छा दामाद और अच्छा पिता बनाने की शिक्षा घर से ही देना होगी | जिससे हम सभी एक

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मनुष्य की इच्छाएँ

मनुष्य की इच्छा (desire) तथा दुःख का परस्पर घनिष्ट सम्बन्ध हैं | जहाँ इच्छा होगी , वहाँ दुःख भी होगा | इच्छा की पूर्ति सदैव नहीं हो पाती , इच्छा की पूर्ति मनुष्य के प्रारब्ध अनुसार ही पूर्ण अथवा अपूर्ण होती हैं | इच्छा पूरी न होने पर दुःख का कारण बन जाती हैं |सेवा

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ईश्वर मंत्रिमण्डल पृथ्वी पर आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक लोकतंत्र का संचालन

शिव (राष्ट्र पिता) ईश्वरों में महा- शिव प्रतिष्ठा में सर्वोच्च शिखर पर आसीन है | भगवान शिव का व्यक्तित्व अद्वितीय हैं | वे सर्व त्यागी हैं | किसी पद और सत्ता के लोभ से सर्वदा मुक्त हैं | वे पद , मुकुट , सिंहासन , मूर्ति-पूजन तथा किसी प्रकार के वैभव के लोभ से पूर्णतः

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मनुष्य के भीतर का द्वंद्व ही असली पीड़ा है

मृत्यु स्वयं उतना कष्ट नहीं देती , जितना कि मृत्यु का भय दुखी बनाता हैं | व्यापार में घाटा हो जाने पर भी एक व्यापारी के सामने ऐसा अवसर नहीं आता कि उसे जीवन व्यापन में कठिनाइयाँ , असुविधा हो तो भी वह इतनी चिंता करता हैं कि सुखकर काँटा हो जाता हैं | उस

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मनुष्य में उत्पन्न होने वाले रोग

सामान्यतः मनुष्य में दो प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं , एक अशुभ तथा अनुचित, अप्राकृतिक खान-पान तथा रहन-सहन के कारण दूसरे प्रारब्ध के कारण | अधिकतर रोगों का कारन अनुचित खान – पान ही होता हैं | यदि खान – पान सादा और प्राकृतिक हो तो पैदा होने वाले रोगो. पर स्वभावतः ही काबू

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जो सोवत है वो खोवत है ,जो जागत है वो पावत है

सामान्य मनुष्य का एक तिहाई जीवन निद्रा ,आलस्य में ही व्यतीत हो जाता है | जहाँ एक ओर जागृत अवस्था का सभी व्यवहार ईश्वर सेवा के माध्यम से परमार्थ।, परोपकार एवं कल्याण सेवा की भी अपेक्षा रखता हैं, वही निद्रा अवस्था का लम्बा समय भी सत्वगुणी मानव के लिए पर्याप्त विचारणीय हैं | निद्राकाल में

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कर भला तो हो भला , सबके भले में अपना भला , मिल बाँटकर खाओं और सभी वैकुण्ठ (Abode Of God) में जाओं

आज परिवार , अड़ोस-पड़ोस , समाज , मोहल्ले में आपस में स्वार्थ की ऋणात्मक ऊर्जा यानि कि छल कपट , ईर्ष्या-द्वेष , लोभ , लालच , संपत्ति के लिए कोर्ट बाजी , तलाक , तिगड़म बाजी , आदि का ही बोल बाला बढ़ता ही जा रहा है , आपस में भरोसा , विश्वास , समन्वयवादी

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अपने कर्म एवं कर्तव्य का पालन करते जाएँ , जीवन में सुख- शांति स्वत: मिलती जाएगी

छोटे- परिवारों में इसी कारण से जीवन की दौड़ में पीछे रह जाते है , यह विचार करे कि घर में बड़े हैं न , जिम्मेदारियों को सँभालने वाले हमारे कर्तव्य भूल कर जब हमें ठोकर लगती हैं तब हमें समझ में आता हैं ? अतः सिर्फ हमारे चाहने मात्र से सुख-शांति की प्राप्ति नहीं

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श्री नवग्रह युक्त बीसा यंत्र समृद्धि और सुरक्षा के लिए नौ ग्रहों की शक्ति को साधें

Shree Navgrah Yukt Beesa Yantra

श्री नवगृह युक्त बीसा यंत्रम् एक अत्यंत प्रभावशाली यंत्र है, जो नवग्रहों के सकारात्मक प्रभाव को संतुलित करने और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह यंत्र उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जो अपने जीवन में ग्रहों के प्रभाव से उत्पन्न समस्याओं का समाधान

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