सामाजिक

Spiritual Leader

सद् गुरु मेरे सद् गुरु श्री स्वामी शिवोम तीर्थ जी महाराज , इनके सद् गुरु श्री स्वामी विष्णु तीर्थ जी महाराज, इनके सद् गुरु स्वामी नारायण तीर्थ देव महाराज जी का आश्रम क्या था ? फूस के दो टपरे तथा वह वृक्ष के नीचे बनी माँ काली। प्राचीन ऋषियों की भांति भिक्षा पर रहकर आश्रम […]

Spiritual Leader Read More »

Human Being

मनुष्य जीव ईश्वर भी सोचता होगा कि यह मैने कैसा जीव (इंसान) बना दिया ? कल्पना के आधार पर एक दूसरे का गला काटने में लगे हैं। ईश्वर के सम्बन्ध में विवाद निरर्थक हैं। आचार्यों ने कुंडली जाग्रत के उपरान्त जैसा अनुभव हुआ सिद्धांत स्थापित कर दिए। उस आधार पर मत- मतान्तर खड़े होते चले

Human Being Read More »

 धर्म संप्रदाय में राजनीती का प्रभाव

आजकल धर्म , सम्प्रदाय और पंथ में राजनीती का प्रभाव अत्यधिक बढ़ रहा हैं।  मनुष्य ने अपने पीछे अधिक से अधिक जन-समुदाय को आकर्षित करने की प्रवृत्ति एवं वृत्ति पनप रही हैं।   जिस प्रकार आज राजनीति में भी हर व्यक्ति अलग – अलग सत्ता स्वार्थवश कड़ी कर रहा हैं, उसी प्रकार धर्म के नाम पर

 धर्म संप्रदाय में राजनीती का प्रभाव Read More »

सुगम-दुर्गम तीर्थ, आस्था की शक्ति

हिमालय पर्वत पर कई तीर्थ हैं। तीर्थ कष्ट तथा अपमान सहन करने के उद्देश्य से विकसित किए गए हैं। अपनी शारीरिक तथा मानसिक क्षमता के अनुसार जो जितना सहन कर सके , वैसी तीर्थ यात्रा चुन सकता हैं। जिनकी सहनशीलता की क्षमता अधिक है ,तो उसे सुगम्य तीर्थों पर जाकर तपने का अवसर प्राप्त ही

सुगम-दुर्गम तीर्थ, आस्था की शक्ति Read More »

ऋषिकेश का नाम ऋषिकेश कैसे पड़ा ?

ऋषिकेश का नाम ऋषिकेश कैसे पड़ा ?

एक बार ऋषिगण , राक्षसों से पीड़ित होकर भगवान के शरणापन्न हुए तो भगवान् द्रवित हो गए।  उन्होंने राक्षसों का नाश किया तथा यह भूमि ऋषियों को प्रदान कर दी। इसका नाम ऋषिकेश हुआ तथा यह हिमालय की तपोभूमि के द्वार पर , किन्तु द्वार के अंदर हैं।  जब तक भक्त साधक का मस्तिष्क ,

ऋषिकेश का नाम ऋषिकेश कैसे पड़ा ? Read More »

मनुष्य की दुविधा

मनुष्य में एक ओर शरीर के प्रति आस्तिक हैं तो दूसरी ओर वह ईश्वर को भी प्राप्त करना चाहता हैं।ईश्वर के लिए हम सारांश में कह सकते हैं कि : ईश्वर की परिभाषा हो ही नहीं सकती। उसे विचारों , भावों , आकारों तथा शब्दों में बाँधा नहीं जा सकता। मनुष्य अपने स्वाभाव से विवश

मनुष्य की दुविधा Read More »

आधुनिक युग की समस्या

आधुनिक युग में यह समस्या कड़ी हो गई कि अन्य मार्गों का आदर करना छोड़ दिया है। लोग अध्यात्म का कोई अनुभव हुए बिना ही गवाही देने लग जाते हैं , तथा जिन्होंने कुछ ध्यान अवस्था में अनुभव प्राप्त किए हैं , उनको झूठा कहते हैं। सभी भक्त साधक अपनी-अपनी उपासना , साधन प्रणाली को

आधुनिक युग की समस्या Read More »

मनुष्य जन्म: भाग्य का उपहार

अपने भाग्य , किस्मत , नसीब को कभी भी दोष मत दीजिये , प्रारब्ध के अनुसार मनुष्य-योनि के रूप में ८४ लाख योनियों के बाद जन्म मिला हैं | यह मनुष्य का भाग्य नहीं तो क्या हैं ? मनुष्य ठोकर खाकर गिर गया , यह बताना आवश्यक नहीं हैं , यह बताना अति आवश्यक एवं

मनुष्य जन्म: भाग्य का उपहार Read More »

परिवार में संस्कार

यदि हमें परिवार , समाज में धनात्मक ऊर्जा पैदा करनी है तो सर्वप्रथम हमें अपने बेटों को एक अच्छा कर्तव्य निष्ठ , सत्य गुणी , ऊर्जावान नागरिक , अच्छा भाई , अच्छा पडोसी , अच्छा पति , अच्छा दामाद और अच्छा पिता बनाने की शिक्षा घर से ही देना होगी | जिससे हम सभी एक

परिवार में संस्कार Read More »

मनुष्य की इच्छाएँ

मनुष्य की इच्छा (desire) तथा दुःख का परस्पर घनिष्ट सम्बन्ध हैं | जहाँ इच्छा होगी , वहाँ दुःख भी होगा | इच्छा की पूर्ति सदैव नहीं हो पाती , इच्छा की पूर्ति मनुष्य के प्रारब्ध अनुसार ही पूर्ण अथवा अपूर्ण होती हैं | इच्छा पूरी न होने पर दुःख का कारण बन जाती हैं |सेवा

मनुष्य की इच्छाएँ Read More »

Shopping Cart
Scroll to Top
Enable Notifications OK No thanks