ब्लॉग

Knowledge and Destiny The Principle of Entitlement

ज्ञान और प्रारब्ध: अधिकार का सिद्धांत एक मुर्ख इंसान संसार भर की सारी पुस्तकें लेकर भले ही अपने पुस्तकालय में रख लें , परन्तु वह केवल उन्ही को पढ़ सकेगा , जिनको पढ़ने का वह उसके प्रारब्धानुसार एवं संस्कार अनुसार वह अधिकारी होगा उन्हें वह अधिकार कर्म के सिद्धांत , प्रारब्ध द्वारा ही प्राप्त होता […]

Knowledge and Destiny The Principle of Entitlement Read More »

Lack Of Foresight Mental And Moral Weakness

दूरदर्शिता की कमी: मानसिक और नैतिक कमजोरी संसार में अधिकांश लोग भविष्य के बारे में निरंतर अदूरदर्शी होते हैं।  हमारा संसार मानो एक क्षुद्र वर्तुल सा होता हैं , हम बस उसी में आबद्ध रहते हैं।  हमारे भीतर दूरदर्शिता के लिए सहन शीलता , धैर्य कदापि नहीं रहता और इसलिए हम दुष्ट और नीच हो

Lack Of Foresight Mental And Moral Weakness Read More »

The Principles of Disciplined Conduct for a Householder

गृहस्थ के लिए मर्यादित आचरण के सिद्धांत धर्मज्ञ गृहस्थ मनुष्य को चाहिए कि वह अपना यश , पौरुष , दूसरों की बताई गुप्त बात तथा दूसरों के प्रति उसके जो कुछ सहायता , मदद , उपकार किया हैं , इन सबका वर्णन सर्व-साधारण के सम्मुख न करें।  कुछ मुख्य बिंदु यश का प्रदर्शन न करें

The Principles of Disciplined Conduct for a Householder Read More »

The Ideal Duties Of A Householder In Raising Sons And Daughters

गृहस्थ के पुत्र-कन्या पालन के आदर्श कर्तव्य पुत्र , कन्या के प्रति गृहस्थ के निम्न लिखित कर्म और कर्तव्य है: चार वर्ष की अवस्था तक पुत्रों और पुत्रियों को खूब लाड-प्यार करना चाहिए फिर सोलह वर्ष की अवस्था तक उन्हें नानाविध सद् गुणों , संस्कार , सद्विचार , नैतिकता , सदाचार रहना , सत्य कर्म

The Ideal Duties Of A Householder In Raising Sons And Daughters Read More »

Ideal Conduct and Qualities of Household Life

गृहस्थ जीवन के आदर्श आचरण और गुण गृहस्थ को अत्यंत निद्रा, आलस्य श्रृंगार तथा भोजन, वस्त्र में लगाव का त्याग करना चाहिए , दिखावे का भी त्याग करना चाहिए।  उसे आहार , निद्रा , भाषण , इत्यादि सब बातें नियंत्रित रूप में ही करनी चाहिए।  उसे दयालु ,विनम्र , सद्भावना रखना , उदारता , नैतिकता

Ideal Conduct and Qualities of Household Life Read More »

Virtue Altruism and Three Worlds

सद्गुण, परमार्थ और तीन लोकों की विजय जो सात्विक मनुष्य सद्गुणों का आचरण कर धन कमाता हैं और समाज की सुविधा के लिए तालाब खुदवाता हैं , वृक्ष लगाता हैं , अस्पताल खुलवाता हैं और निरंतर परमार्थ , परोपकार और जीव-निर्जीव के कल्याण में लगा रहता हैं , वह तीनों लोकों को जीत लेता हैं। 

Virtue Altruism and Three Worlds Read More »

A Great Person Is Connected to Spirituality

महापुरुष से अध्यात्म जुड़ा हैं जहाँ किसी आश्रम , मंदिर में कोई दिव्य सद् गुरु, महापुरुष निवास करते हैं या उसके जीवन की कोई अध्यत्मिक-विशेष घटना घटित होती हैं , तो उस सद्गुरु , महापुरुष के दिव्य-शरीर से निकलने वाली सूक्ष्म-आध्यात्मिक चेतन तरंगे , वहाँ के वातावरण में फैल जाती हैं , जिसका प्रभाव लम्बे

A Great Person Is Connected to Spirituality Read More »

Just As A Devotee Becomes A Seeker They Envision Their Own Idea Of God In Their Unique Way

जिस प्रकार भक्त साधक होता हैं , वैसे ही अपने-अपने ईश्वर की कल्पना कर लेता हैं। जिस प्रकार भक्त साधक होता हैं , वैसे ही अपने-अपने ईश्वर की कल्पना कर लेता हैं।  उदाहरण के लिए यदि आप उत्तर प्रदेश में जाएँ तो भगवान कृष्ण तथा राधा जी , राम तथा सीता जी , आप को

Just As A Devotee Becomes A Seeker They Envision Their Own Idea Of God In Their Unique Way Read More »

Spiritual Leader

सद् गुरु मेरे सद् गुरु श्री स्वामी शिवोम तीर्थ जी महाराज , इनके सद् गुरु श्री स्वामी विष्णु तीर्थ जी महाराज, इनके सद् गुरु स्वामी नारायण तीर्थ देव महाराज जी का आश्रम क्या था ? फूस के दो टपरे तथा वह वृक्ष के नीचे बनी माँ काली। प्राचीन ऋषियों की भांति भिक्षा पर रहकर आश्रम

Spiritual Leader Read More »

Human Being

मनुष्य जीव ईश्वर भी सोचता होगा कि यह मैने कैसा जीव (इंसान) बना दिया ? कल्पना के आधार पर एक दूसरे का गला काटने में लगे हैं। ईश्वर के सम्बन्ध में विवाद निरर्थक हैं। आचार्यों ने कुंडली जाग्रत के उपरान्त जैसा अनुभव हुआ सिद्धांत स्थापित कर दिए। उस आधार पर मत- मतान्तर खड़े होते चले

Human Being Read More »

Shopping Cart
Scroll to Top
Enable Notifications OK No thanks