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Affinity: The Source of Positive Energy and Noble Actions

संसार में कुछ ही मनुष्य ऐसे होते हैं, जिनके भीतर धनात्मक आत्मीयता की भावना कूट-कूट कर भरी होती है। आत्मीयता का अर्थ होता है – अपनी आत्मा के समीपस्थ होकर उसके दिव्य स्वरूप को समझना और उसकी सत्य आवाज को सुनना। प्रत्येक आत्मा की अपनी एक आवाज होती है, और जो व्यक्ति अपनी आत्मा की […]

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Destiny and Effort: Life’s Direction and Decisions

मनुष्य का प्रारब्ध (भाग्य, नसीब, डेस्टिनी) एवं पुरुषार्थ – मनुष्य को इसी जीवन में अदृश्य प्रारब्ध अर्थात भाग्य और पुरुषार्थ शब्दों की सत्य व्याख्या और उनके निर्णय को समझ लेना बहुत ही आवश्यक है। इस तथ्य को न समझ पाने के कारण कितनों का यह दिव्य और सुंदर जीवन असमंजस व दुविधा के अंधकार में

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Mind & Consciousness: The Divine Power of Life

यह भारतीय अध्यात्म का शाश्वत सत्य सिद्धांत है कि चेतना पत्थर में सोती है, वनस्पति में जागती है, पशु में चलती है, और मनुष्य में चिंतन, विचार, परमार्थ, परोपकार एवं मानव कल्याणार्थ कार्य करती है। इसी तथ्यात्मक सत्य के कारण मनुष्य परम पिता परमेश्वर का सृष्टि में सच्चा साथी है। अतः सत्य का शाश्वत चिंतन

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The Search for Happiness: Reality or Illusion?

सुख इंसान को कैसे मिल सकता है? किसी को धन के अभाव का दुःख है तो कोई धन की सुरक्षा को लेकर भयभीत है। चारों ओर संकट, कठिनाइयों और समस्याओं से भरी हुई गठरी है। आजकल ज्यादातर लोगों को धन-संपत्ति की बहुलता के कारण परिवारजनों में आए विवाद तथा उनके परस्पर झगड़े-बखेड़े परेशान किए हुए

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The Value of Time: The Key to Success and Spiritual Practice

भारतवासियों में समय की पाबंदी का यही हाल है कि समय की कोई कीमत उनके लिए नहीं होती। यदि उन्हें वायुयान भी पकड़ना हो तो वे अंतिम समय पर ही पहुँचते हैं। यही स्थिति जीवन में भी होती है। युवावस्था में, जब जप-तप, उपासना और साधना का उचित समय होता है, तब कोई इन कार्यों

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Sakam Karma: The Root of Greed and Discontent

सकाम या सकामी करने का उद्देश्य व्यक्ति के सकारात्मक जीवन से नहीं जुड़ा होता, बल्कि तृष्णा से जुड़ा होता है।एक सकामी व्यक्ति अपने मन और चित्त को खाने-पीने, देखने-सुनने आदि की इच्छाओं में उलझाए रखता है। वह चोरी, छल-कपट और अन्य कुकर्मों के माध्यम से धन जुटाने का प्रयास करता है और उसे संचित करता

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The Declining Moral Standards in Education: Causes and Reflections

आजकल विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अधिकतर शिक्षकों एवं प्रोफेसरों का नैतिक स्तर अत्यंत शोचनीय एवं विचारणीय हो गया है।पहले के शिक्षकों का वेतन आज की अपेक्षा बहुत कम था, फिर भी वे कर्तव्यनिष्ठ होकर निःस्वार्थ भाव से विद्यार्थियों को विद्या प्रदान करते थे। उस समय भी जीवन यापन सुचारू रूप से चलता था, आवश्यकताएँ पूरी

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Selfish Happiness: Temporary Joy at the Cost of Other’s Suffering

ज्यादातर व्यक्ति परिवार और समाज में ऐसे होते हैं, जो स्वयं केवल अपना ही सुख चाहते हैं, लेकिन दूसरों के सुख का ख्याल बिल्कुल नहीं रखते। इन लोगों को केवल अपने और अधिक से अधिक अपने परिवार, जैसे सगे भाई-बहनों के स्वार्थ का ही ध्यान रहता है। इस सुख को प्राप्त करने के लिए ये

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Past Life Memories and Nature’s Law

मनुष्य को पूर्व जन्म की घटनाएं एवं बातें क्यों याद नहीं रहती? मनुष्य अपनी चालाकी से कभी भी बाज नहीं आया है। विषयासक्ति के कारण इस संसार में अनेक साधन हैं, जिनकी भौतिकता की छाप गहराई से पड़ गई है। वह संसार के मोह और लालच के वश में आकर इन्हें कदापि भूलना नहीं चाहता।

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Actions and Their Consequences

मनुष्य के कर्मों का सुधार तो तुरंत ही हो सकता है, परंतु कर्मों का फल तुरंत नहीं मिलता। जितनी देर से कर्मों का फल मिलता है, उतनी ही देर से उसके सुधार की बात भी समझ में आती है। जहरीले साँप के काटते ही आदमी की तुरंत मृत्यु हो जाती है। यह ऐसा कर्म है,

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